Poetic comment from Sanjay Singh Bora
Thursday, March 11th, 2010I am the Tiger
4est है मेरा घर
सब डरते थे मुझसे पहले, अब वो मुझे डराते हैं, अंधविश्वास के चक्कर मुझे मारने आते हैं.
एक समय ऐसा भी था मेरा, जंगल में था राज मेरा.
हरा था जंगल, भरा था जंगल. तब था सुन्दर मेरा जंगल.
अब लोग घास काटने आते हैं, पेड काट ले जाते हैं. पहले ही कुछ कम था जो मेरा भोजन भी खाजाते हैं.


